महिषासुर एक जननायक
बेस्ट सेलर रही पुस्तक महिषासुर एक जननायक का यह दूसरा...
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बेस्ट सेलर रही पुस्तक महिषासुर एक जननायक का यह दूसरा संस्करण है। यह किताब भारत में शुरू हुए बहुजन सांस्कृतिक विमर्श पर आधारित है। इस पुस्तक में संकलित एक लेख में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व दिशोम गुरु शिबू सोरेन कहते हैं, "जब बचपन में मैं रावण वद्ध और महिषासुर मर्दिनी दुर्गा के बारे में सुनता था तब अजीब लगता था। अजीब लगने की वजह यह थी कि महिषासुर और उसकी वेशभूषा बिल्कुल हमलोगों के जैसी थी। वह हमारी तरह ही जंगलों में रहता था, गायें चराता था, शिकार करता था। फिर एक सवाल जो मुझे परेशान करता था, वह यह कि आखिर देवताओं को हम असुरों के साथ युद्ध क्यों लड़ना पड़ा होगा। फिर जब बड़ा हुआ तो सारी बारें समझ आयी कि यह सब अभिजात्य वर्ग की साजिश थी, हमारे जल, जंगल और जमीन पर अधिकार करने के लिए। जब मुझे वर्ष 2005 में झारखंड का मुख्यमंत्री बनने का मौका पहली बार मिला, तब मैंने झारखंड में रहने वाले असुर जाति के लोगों के कल्याण के लिए एक विशेष सर्वे करने की योजना बनायी थी। इसका उद्देश्य यह था कि विलुप्त होती जाति को बचाया जा सके और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। वर्ष 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर भी मैंने इस दिशा में एक ठोस नीति बनाने की पहल की, लेकिन ऐसा न हो सका। बहरहाल आज की युवा पीढ़ी अभिजात्यों द्वारा फैलाये गए अंधविश्वास की सच्चाई को समझे और नये समाज के निर्माण में योगदान दे।"
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- ISBN10:9387441008
- ISBN13:9789387441002
- kindle Asin:9387441008







